रविवार, 12 अप्रैल 2009

सेक्स और जेंडर में अन्तर

नारीवाद का सबसे बड़ा योगदान है "सेक्स" और "जेन्डर" में भेद स्थापित करना . सेक्स एक जैविक शब्दावली है ,जो स्त्री और पुरुष में जैविक भेद को प्रदर्शित करती है . वहीं जेन्डर शब्द स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक भेदभाव को दिखाता है . जेन्डर शब्द इस बात की ओर इशारा करता है कि जैविक भेद के अतिरिक्त जितने भी भेद दिखते हैं,वे प्राकृतिक न होकर समाज द्वारा बनाये गये हैं और इसी में यह बात भी सम्मिलित है कि अगर यह भेद बनाया हुआ है तो दूर भी किया जा सकता है . समाज में स्त्रियों के साथ होने वाले भेदभाव के पीछे पूरी सामाजीकरण की प्रक्रिया है,जिसके तहत बचपन से ही बालक-बालिका का अलग-अलग ढंग से पालन-पोषण किया जाता है और यह फ़र्क कोई भी अपने आसपास देख सकता है . लड़कियों को घर के अन्दर का कामकाज अच्छी तरह सिखाया जाता है,जबकि लड़कों को बाहर का . लड़्कियों को दयालु, कोमल, सेवाभाव रखने वाली और घरेलू समझा जाता है और लड़कों को मजबूत,ताकतवर, सख्त और वीर समझा जाता है .हालाँकि अब स्थिति में थोड़ा सुधार आया है पर हर जगह नहीं और हर स्तर पर नहीं .यह नहीं कहा जा सकता कि किसी तरह के किसी काम में कोई बुराई है पर काम के इस वर्गीकरण से बहुत सी लड़कियों की प्रतिभा दबी रह जाती है और बहुत से लड़के मानसिक विकृतियों के शिकार हो जाते हैं .यह सुनने में अटपटा लग सकता है,पर सामान्यतया छोटे लड़कों को यह कहकर चुप कराते हैं कि मर्दों को रोना नहीं चाहिये,हम उनसे भावनात्मक बातें नहीं करते ,जिससे वे अन्दर ही अन्दर घुटते रहते हैं . कुछ लड़के बहुत भावुक होते हैं और अक्सर अपनी बात कहकर इसलिये रो नहीं पाते कि लोग उन्हें चिढाएंगे . कुल मिलाकर, जेन्डर-आधारित भेदभाव न सिर्फ़ औरतों को, बल्कि पुरुषों को भी एक बने-बनाये ढाँचे में जीवन जीने के लिये मजबूर कर देता है.

11 टिप्‍पणियां:

  1. सही बात कही आपने .....बहुत से घरों में ऐसा होता है

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  3. काम के इस वर्गीकरण से बहुत सी लड़कियों की प्रतिभा दबी रह जाती है और बहुत से लड़के मानसिक विकृतियों के शिकार हो जाते हैं .sahi kaha.

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  4. नहीं चलेगी जिन्दगी दोनों का हो मान।
    नारी के सम्मान में पुरूषों का सम्मान।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  5. बहुत सटीक लिखा है।इसी बेड वाव को दूर करने की जरूरत है।

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  6. very true....insan ko Uske interest k according jeene Ka haq h ....

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  7. वर्ष 1966 में इलिनर मेक्काबी के पचास वर्षों के परीक्षण के बाद में उन्होंने अपनी पुस्तक डेवलपमेंट ऑफ सेक्स डिफरेंस में स्त्री पुरुष की मानसिक शक्ति एवं बुद्धि समान है जिनमे कोई भेद नही है

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बहस चलती रहे, बात निकलती रहे...