ऑरकुट पर नारीवाद से सम्बंधित कम्युनिटी ढूँढते हुए मैंने नारीवाद-विरोधी कम्युनिटी भी देखीं .कुछ ऐसी भी हैं जिनका कहना है की वे feminists से नफरत करते हैं पर humanists से प्यार करते हैं .वैसे ,इस democratic देश में सभी को अपनी पसंद और विचार जाहिर करने का अधिकार है ,पर मैंने देखा है कि जो लोग जिसके बारे में नहीं जानते ,वे ही सबसे अधिक विरोध करते हैं .नारीवाद की ना कभी पुरुषों से दुश्मनी रही है और ना ही मानववाद से . तो जब कोई यह कह रहा होता है कि वह नारीवाद को इसलिए पसंद नहीं करता कि वह पुरुषों का विरोधी है ,तो वह अपने इस विषय में कम ज्ञान को दिखा रहा होता है .नारीवाद एक ऐसा सिद्धांत है जो समाज के उस पक्ष को प्रस्तुत करता है ,जहाँ सदियों से औरत को दूसरे स्थान पर रखा गया .अब लोग यह भी कह सकते हैं की हमारे देश में कभी नारी की पूजा होती थी ,यह बात भी पूरी तरह सच नहीं है ,इसके विषय में भी किसी को अच्छी तरह पढ़ के ही बोलना चाहिए .anti-feminism आज-कल उसी तरह fashion हो गया है ,जैसे किसी समय feminism का था .पर किसी भी विचार का समर्थन या विरोध करते समय कम से कम उसका कुछ ज्ञान तो होना ही चाहिए और मेरे विचार से एक बार नारीवाद को जान लेने के बाद कोई उसका विरोध नहीं करेगा , सहमत भले ही ना हो .
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शनिवार, 11 अप्रैल 2009
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